तुझे फूलो की कतारों में देखा है, तुझे पत्तो की कतारों में देखा है,
ऐ इन मासूम कलियों की कसम तुझे इनकी बहारों में देखा है।
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ऐ इन दिलनशी अदाओं की कसम , तुझे इनकी इशारों में देखा है।
तुझे बचपन में देखा है , तुझे जवानी में देखा है,
ऐ इन दिलकश फिजाओं की कसम , तुझे हुस्न की हर अदाओं में देखा है
तुझे इश्क में देखा है , तुझे हुश्न में देखा है,
ऐ इन पागल आशिको की कसम , तुझे इनकी पाक वफ़ाओ में देखा है।
तुझे ज़मीन में देखा है, तुझे आसमाँ में देखा है,
ऐ इन हसीं नजारों की कसम , तुझे दुनिया के हर किनारों में देखा है।
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ऐ इन प्यारे नगमो की कसम , तुझे हर महफ़िल और मुशायरे में देखा है।
तुझे सपनों में देखा है , तुझे हकीकत में देखा,
ऐ इन हसीन खवाबो की कसम , तुझे रात के उजाले में देखा है।
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राजेश साव
राजेश साव
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